FLASH NEWS: July 2010: 16269 people received medical care in 51 medical camps *** 570 cataract surgeries were performed. 519 pairs of eye glasses were distributed *** 8,041 people were touched through the ministry of our counseling center via inbound and outbound phone calls, letters, emails, and SMS *** 1574 HIV patients were given medicines for opportunistic infections with food supplements and counseling*** 7500 people benefited through 25 potable bore wells*** 19964 people visited our websites<<>> ताजा समाचार: जुलै 2010 : 16269 लोगों को 51 स्वस्थ्य शिविरों के द्वारा चिकित्सा किया गया हैं।*** 570 मोतिया बिन्द के ऑपरेशन किया गया हैं।*** 8, 041 लोगों ने पत्रों, फोन, ई-मेल और एस.एम.एस के द्वारा हम से समपर्क किया था।*** 519 ज़रूरतमन्द लोगों को नज़र के चश्में प्रदान किया गया हैं।*** 1574 एच.अइ.वि जरुरतमन्द लोगों को पोषण आहार दिया गाया है। *** 7500 लोगों ने ओ.बी.आई. द्वारा खोदे गए 25 बोर वेल से स्वच्छ पानी की सुविधा पाई थी। *** 19964 लोगों ने हमारे वेबसैट्स देखा है।
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आप पूछेंगे कैसे ?  
परमेश्वर की सेवा के लिए उसके खेत में अपने पैसे का बीज बोएँ – वचन  

नीति वचन के 11 अध्याय के 25 पद में कहता है, “उदार प्राणी हृष्ट-पुष्ट हो जाता है, और जो दूसरों को सींचता है, उसकी भी सींची जाएगी।” वचन नीति वचन के 11 अध्याय के 25 पद में यह भी कहता है, “ऐसे हैं जो छितरा देते हैं, तौ भी उनकी बढ़ती ही होती है, और ऐसे भी हैं जो यथार्थ में कम देते हैं और इससे उनकी घटी होती है।” व्यवस्थाविवरण के 16 अध्याय के 1. पद में लिखा है, “तब अपने परमेश्वर यहोवा की आशीष के अनुसार उसके लिए स्वेच्छा बलि दे कर सप्ताहों का पर्व मनाएँ।” 

 

प्रभु की सेविकाई में दान देने के क्षेत्र  

 

1. ऑपरेशन ब्लेसिंग  

 

बूँद-बूँद करके सागर बनता है। हर बूँद दूसरी के साथ मिल कर ही सागर को जन्म देती है। यही दान और उपहारों की भी रीति है। जब एक सहायक छोटे से छोटा दान भी हमें भेजता है तब वह बहुत से लोगों के जीवनों में एक सकारात्मक कार्य कर सकता है। आप भी इस सागर में एक बूँद डाल कर सी.बी.एन.के कार्य क्षेत्र में सहायक हो सकते हैं, जो ऑपरेशन इन्डिया के द्वारा सम्पन्न किया जा रहा है। 

 

एक छोटा उपहार या फिर दान एक छोटे बच्चे बच्चे के जीवन की सहायता कर सकता है जिससे वह स्कूल जाकर शिक्षा प्राप्त कर सकता है। शायद आपके दान के द्वारा एक कटे होंठ वाले बच्चे का ऑपरेशन किया जा सकता है जिससे उसे शेष जीवन में संसार के तिरस्कार और सताव से बचाया जा सके।   

 

यह ऐसे व्यक्ति की सहायता भी कर सकता है जो कड़ा संघर्ष कर रहा है जिससे घर के लिए साफ पानी ला सके। आप के दान की सहायता से हम उस स्थान पर एक बोर-वेल खोद कर उनकी समस्या को हल कर सकते हैं। 

 

यह दान शायद किसी एच.आई.वी. ग्रसित रोगी के लिए उस मलहम  समान हो जो अपने को जीवन से पूरी तरह निराश और अकेला अनुभव करता  है। वह दान किसी अपाहिज को स्वतन्त्रता प्रदान कर सकता है जब ओ.बी.आई. आप की सहायता से उसे एक व्हील चेअर प्रदान कर सकेगा। आपका दान संकट और प्रकृतिक विपत्ति के समय में किसी के लिए जीवन दान साबित हो सकता है। और किसी के भी जीवन अपन एक कर्म के द्वारा आप किसी का पूरा जीवन बदल सकते हैं।  

 

आप की उदारता शायद उनकी प्रार्थना का उत्तर हो सकता है। आप का दिया उपहार या दान उन लोगों की प्रार्थनाओं से जिन्हें आशीष मिली है, आपके लिए भी आशीष का कारण होगा। तब आप को भी इस बात से संतोष होगा कि आपकी मेहनत की कमाई ऐसी जगह खर्च की गई जिस का वर्णन स्वर्ग के खाते में लिखा जाएगा क्योंकि वह परमेश्वर के काम के लिए इस्तेमाल किया गया था।  लेने से देना अच्छा है। प्रे. के काम के 2. अध्याय के 35 पद में लिखा है, “मैं ने तुम्हे सब कुछ करके दिखाया है कि इस रीति से परिश्रम करते हुए निर्बलों को सम्भालना और प्रभु यीशु के वचनों को स्मरण रखना आवश्यक है। जो भी उसने आप से कहा है कि लेने से देना धन्य है।” जब भी आप खुले दिल से दान देते हैं तब वचन 2 कु. के 9 अध्याय के 7 पद में कहता है, “हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे, न कुड़-कुड़ कर और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।” परमेश्वर आप को आशीष दे जब आप परमेश्वर के कार्य के लिए दान देते हैं।  

 

2. बच्चों के लिए दान दें  

 

छोटे जीवन, छोटे सपने, मासूम चेहरे और छोटी-छोटी इच्छाएँ। एक छोटे बच्चे को खुश करने के लिए अधिक कुछ नहीं चाहिए।  

 

संसार में अनगिनत बच्चे हैं जिन की रोज़ की ज़रूरतें भी पूरी नहीं की जा सकती हैं। अनेक बच्चे ऐसे है जो अपने सपनों को एक ओर छोड़ कर छोड़ कर रोटी के लिए काम करते हैं। वे तो किसी बात की आशा भी नहीं कर सकते हैं क्योंकि उनके पास माता पिता का सहारा भी नहीं है जिस से वे स्कूल की पढ़ाई कर सकें। फिर कुछ ऐसे भी हैं जो तिरस्कृत जीवन जीते हैं क्योंकि उनका जन्म कटे होंठ के साथ हुआ था। 

 

आपका एक छोटा सा कदम इन बच्चों के जीवन में भारी परिवर्तन ला सकता है। विद्या का अर्थ है शिक्षा और ज्योति का अर्थ है उजाला।  ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया उनकी सहायता करने के लिए वचनबद्ध है कि उनके द्वारा लिए गए हर कदम से जो विद्या ज्योति संस्था उठाती है वह बच्चों की शिक्षा या फिर जन्म से कटे होंठ वाले बच्चों के ऑपरेशन द्वारा बच्चों के जीवन में उजाला फैला सके। 

 

क्या आप अनुभव कर सकते हैं कि एक बच्चा जिसे पढ़ने का शौक हो जब उसे किताबें, स्कूल के यूनिफार्म उपहार में दिया जाए और उन्हें स्कूल भेजा जाए, तो वे कैसा अनुभव करेंगे ? हमारे विद्या-ज्योति स्कूल के छात्रों ने इस आनन्द को अनुभव किया था। वे जान गए थे कि अब उन्हें कचरे से सामान उठाने वाले का काम नहीं करना पड़ेगा और व ही यौन व्यापार करना पड़ेगा। 

        

वे निराश और दुखों को अपने पीछे छोड़ चुके हैं। हम यह कहते हुए गर्व का अनुभव करते हैं कि उन बच्चों ने 1.वीं कक्षा पास कर ली है। वे अब अपने लिए सब कुछ अच्छा कर पाते हैं। हमारे लिए ये बच्चे अगुवों से कम नहीं हैं क्योंकि वे केवल अपना भविष्य ही नहीं बदल रहे हैं वरण अपने परिवार का भविषय भी बदल रहे हैं।  

 

क्या आप ऐसे बच्चों की ओर अपनी सहायता का हाथ बढ़ाएँगे ? क्या आप देखना चाहेंगे कि किस प्रकार बच्चे अपने सपनो की उड़ान भरते हैं ? यदि हाँ तो विद्या ज्योति में अपने दान का बीज बोएँ !!! 

 

हम अकसर ऐसे बच्चों को देखते हैं जिनके होंठ कटे हुए होते हैं या जिनका तालु सही रीति से निर्मित नहीं हुआ होता है। ऐसे बच्चों में लड़कियाँ अधिकतर एक बड़ी समस्या का सामना करती हैं क्योंकि उनकी शादी कराना एक बड़ी समस्या बन जाती है। तब इन बच्चों को श्रापित कहा जाता है क्योंकि वे कटे होंट के साथ पैदा हुए थे। माता-पिता उनके जन्म की खुशी भी नहीं मनाते हैं। वे यही कहते हैं कि काश यह पैदी ही न हुआ होता। पर ओ.बी.आई. उन्हें इस प्रकार नहीं देखता है। उनके मासूम चेहरों में हमें वह सुन्दरता दिखाई देती है जो परमेश्वर ने उनके लिए चाही थी। ऑपरेशन के द्वारा डॉक्टर न केवल उसे कटे होंठ को सही रूप देते हैं वरण उन्हें एक नया जीवन प्रदान करते हैं जो तिरस्कार से दूर, प्रेम से भरा है।  

 

क्या आप किसी बच्चे को वह सामान्य जीवन देना पसंद करेंगे ? क्या आप किसी लड़की को तिरस्कार और अपमान के के सताव के जीवन से बचाना चाहेंगे  और उसका मान सम्मान उसे लौटाना पसंद करेंगे ? तो  ऐसा दान दें जिस के द्वारा ओ.बी.आई. एक और बच्चे का कटे हुए होंठ का ऑपरेशन कर सकें।  

 

3. अपाहिज लोगों के लिए दान दें  

 

वह दिन-रात बिस्तर पर पड़ा रहता है क्योंकि वह अपने आप चल फिर नहीं सकता है। जब से उसने अपनी सामर्थ खोई है तब से वह हर दिन हर बात के लिए इन्ताज़ार करता रहता है कि कुछ प्राप्त कर सके। उसे प्रतीक्षा करनी पड़ती है कोई आकर उसकी करवट बदलनें में सहायता करे, कोई उसे एक गिलास पानी दे दे, यहाँ तक कि जब उसे शौच के लिए भी जाना हो तो भी दूसरों पर आश्रित रहना पड़ता है। उसका सारा समय केवल खिड़की से बाहर देखने में ही बीत चाहता है। उसके मन मे केवल एक ही इच्छा होती है कि काश मैं यहाँ से कहीं और होता, कहीं भी, पर इस जगह पर एक ही स्थान में जड़ न होता।  

 

उसके माता-पिता को भी दुख होता है क्योंकि जिस दिन यह अप्रिय घटना घटी थी कुछ भी सामान्य नहीं रहा था। उनकी सहायता करने वाला कोई भी नहीं है। वे हताश हो कर हर दिन जीते हैं। उनके लिए कोई सहायता नहीं होती है। उन्हें भी लगता है जैसे उनके जीवन का अन्त आ चुका है। सम्बन्धी और मित्र इस प्रकार देखते हैं जैसे वे कोई अपराधी हों जिन्होंने कोई ऐसा घोर पाप किया था जिसका इतन दर्दनाक अन्त हुआ है। उनके आँसु सूख चुके हैं और उनकी प्रार्थनाएँ भयानक पीड़ा बन कर रह गई हैं। 

 

अपाहिज होना या किसी अपाहिज की देखभाल करने का अर्थ है एक भारी बोझ को उठाना। अधिकतर समय ऐसा लगता है मानो उन्हें बिना किसी सहायता या सांत्वना के केवल पीड़ा का ही सामना करना है। जब कि उन्हें सहायता की आवश्यक्ता होती है जो उनकी पीड़ा को बाँट कर उन्हें सांत्वना दे सके। उन्हें ऐसी सहायता की आवश्यक्ता होती है जिससे वह जीवन का पूरा आनन्द उठा सकें और भरपूर जीवन जी सकें। व्हील चेअर उनके लिए सब से बड़ी और अच्छी सहायता हो सकती है जो धूम फिर नहीं सकते हैं और हर समय बिस्तर पर पड़े रहते हैं। पर अनेक लोगों के लिए इसे खरीदना असम्भव प्रतीत होता है क्योंकि उनके पास उसे खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं। या फिर यह कहाँ से प्राप्त की जा सकती है इसका ज्ञान नहीं होता है।  

 

ओ.बी.आई. ऐसे ही लोगों के लिए प्रयास करके उनकी सहायता करता है कि वे अपनी अपंगता पर विजय पा सकें। वे उन्हें जीने के लिए एक नया जीवन प्रदान करते हैं। व्हील चेअर का उपहार उनके तथा उनके परिवार के लिए एक जीवनदाई जड़ी बूटी के समान होता है। एक व्हील चेअर एक अपाहिज के लिए बाहरी संसार के द्वार खोल देती है। परिवार के लोगों के लिए भी यह सुविधाजनक है क्यों फिर उन्हें अपने अपंग प्रिय जन को हर बर गोद में उठा कर नहीं ले जाना पड़ता है। ओ.बी.आई. के द्वारा ऐसे 75. अपंग लोग है जो व्हील चेअर की आशीष के द्वारा स्वावलम्बी हो गए हैं। यह केवल इस लिए सम्भव हो पाया है कि बहुत से लोगों ने इस सेवा में अपने दान का बोकर ओ.बी.आई. की सहायता की है।  

 

क्या आप भी सहायक बनना चाहेंगे  और किसी अपंग को आशीषित करना चाहेंगे? क्या आप किसी अपाहिज को एक ऐसा उपहार देना चाहेंगे जो उसके जीवन को ही बदल कर रख देगा ?  ओ.बी.आई. की सहायता कर उनके हाथ मज़बूत करें कि वह किसी और अपाहिज के जीवन को आशीषित कर सकें। 

 

4. आपत्कालीन परिस्थिति से ग्रसित लोगों की सहायता के लिए दान दें  

 

परिवारों के लिए जीवन सामान्य रूप से चलता रहता है, जब तक कोई आपत्कालीन परिस्थिति आघात नहीं करती है और गाँव में सब कुछ नाश कर देती है। सालों साल के परिश्रम के बाद लोगों ने अपने जीवन को बनाया था और क्षण भर में सब कुछ नाश हो गया। कुछ परिवार के लोग मारे गए और दूसरों को चोटें आईं। अपने जीवन को यूं बिखरा, घायल और टूटा-फूटा देख कर उनकी आँखों में आँसु उमड़ पड़े थे। ऐसी अवस्था मे कोई भी नहीं था जिस पर वे भरोसा कर पाते या उन्हें कहीं से सहायता मिल जाती।    

 

वे अधिकारियों की ओर फिरे, पर वे भी इस अचानक परिस्थिति से पूरी तरह  पराजित थे। उनके पास बहुत से लोग थे जिन की देखभाल करनी थी परन्तु सहायता के उपाय नियमित थे। हर और से निराश और दुखी मन से वे अपने टूटे-फूटे घरों को वापस लौट आए। उनकी सब से बड़ी चिन्ता यही थी कि उन्हें दो टूक भजन भी कहाँ से मिलेगा जिससे वे अपने बच्चों के पेट भर सकेंगे? वे रात कहाँ बिताएँगे ? अब वे क्या करेंगे क्योंकि उनके औज़ार भी नष्ट हो चुके थे? जो भी काम वह कर सकते थे वे भी जाते रहे।  

 

माएँ अपने बच्चों से लिपटी रहीं यह सोच कर कहीं उनके बच्चों को कुछ न हो जाए। उनके पेट भूख के मरे जल रहे थे पर वे नहीं जानते थे कि अपने बच्चों को क्या खिलाएँगे? बच्चे भी इस घटना से परेशान थे, और जो कुछ हुआ था उसे समझ नहीं पा रहे थे। उस समय उनके बड़े भी उनके लिए किसी प्रकार से सहायक नहीं थे क्यों कि वे निस्तब्ध थे। बच्चे कभी रोते कभी शिकायत करते पर उनके नन्हें मन कुछ भी समझ नहीं पा रहे थे सिवाय इसके कि उनके घर टूट-फूट चुके थे, उनके खिलौने और सारा सामान कुछ भी बाकी नहीं था। उनका छोटा सा स्कूल भी टूट-फूट चुका था। वे सब एक साथ मिल कर चुपचाप अपने टूटे खिलौनों से खेलने का प्रयास कर रहे थे।  

 

पुरूष भारी परेशानी से दबे थे। समय उनके वश में नहीं था। उन्हें कोई उपाय ढूँढना था जिससे सब कुछ पहले जैसा सामान्य हो सके। बिना नौकरी और घर की छत के यह असम्भव था कि वे अपने परिवार को भोजन खिला सकें। उन्हें कोई दूसरा रास्ता खोजने की आवश्यक्ता थी। पर कोई क्या कर सकता है यदि नौकरी न हो ? ऐसी परिस्थिति में तो सभी बरोज़गार थे। दूसरी बात यह भी थी कि न तो वे पढ़े लिखे थे और न ही उनके पास कोई हुनर था। वे तो केवल साधारण मज़दूरी करते थे। उन्हें नए अवसर कहाँ मिलेंगे ? किसी दूर गाँव में ही यह सम्भव हो सकता है। तब उन्हें एक ही उपाय दिखाई देता है कि वे स्वयं शहर जाकर कुछ काम करें और परिवार को वहीं गाँव में छोड़ जाएँ। 

 

ऐसे ही समय में लोगों ने एक बस को गाँव में आते देखा था। वह ओ.बी.आई. की टीम थी जो वहाँ पर के दूर अन्देश स्थान में भी सहायता के लिए आई थी जहाँ अब तक कोई सहायता नहीं पहुँची थी। 

 

सब लोग बस के चारों ओर इकट्ठे हो गए थे। उन्होंने देखा कि जिस चीज़ की उन्हें बहुत आवश्यक्ता थी वह वहाँ पर परोसी गई थी। इस बात ने उनके दिल को छू लिया था। उन्होंने हर परिवार को भोजन तथा अनाज दिया जिससे कुछ दिनों के लिए उनकी भोजन की समस्या हल हो सके। तब एक माँ की आँखों से आँसु बहने लगे यह देख कर कि उसके भूखे बच्चों के लिए भोजन आया है। तब उसने परमेश्वर का धन्यवाद किया उस भोजन के लिए जो उन्हें जीवित रहने के लिए भेजा गया था। तब पुरूषों को भी सांत्वना मिली क्योंकि वह जान गए थे कि जो सामान ओ.बी.आई. टीम दे रही थी उसकी सहायता से वे अपने लिए एक अस्थाई छत का आयोजन कर लेंगे। धीरे-धीरे उनके मन पर छाए दुख के बादल छटने लगे और आशा का सूरज चमकने लगा। उनकी निराशा जाती रही और उनके दिलों में एक शान्ति आ गई थी। वे जान चुके थे कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा। थोड़ा समय अवश्य लगेगा पर वे अपना जीवन फिर से पहले जैसा बना पाएँगे। धन्यवाद हो कुछ अजनबियों की सहायता का। 

 

क्या आप वह अजनबी बनना चाहेंगे जो आपत्कालीन परिस्थिति में दूसरों को सहायता भेजना चाहेंगे ? क्या आप किसी के आँसु पोंछ कर उन्हें सांत्वना देना चाहेंगे ? क्या आप ऐसे समय में आवश्यक सामग्री लोगों तक पहुँचाना चाहेंगे ? यदि हाँ, तो ओ.बी.आई. के हाथों को मज़बूत करें और पूरे भारत में आपत्कालीन परिस्थिति में सहायता दें। आप के दान की सहायता किसी टूटे परिवार के घर को दुबारा बनाने में सहायक हो सकती है। तब उनका धन्यवाद और उनकी प्रार्थनाएँ आपके जीवन में आशीषें भर देंगी। जीवन बचाएँ, आज ही किसी के जीवन को छुएँ।  

 

5. शिक्षा हेतु दान दें

 

छोटे जीवन, छोटे सपने, मासूम चेहरे और छोटी-छोटी इच्छाएँ। एक छोटे बच्चे को खुश करने के लिए अधिक कुछ नहीं चाहिए। अनेक बच्चे तो यह भी नहीं जानते हैं कि सपना क्या होता है क्योंकि उनका जीवन तो ऐसे ही बीत जाता है क्योंकि कभी-कभी जीवन की रोज की ज़ररत भी पूरी नहीं होती है। अपनी परिस्थितियों के कारण उन्हें छोटी सी उमर में ही काम करना पड़ता है जिससे से रोज की रोटी खा सकें। यह इस लिए होता है क्योंकि उनके पास अपने माता पिता की भी सहायता नहीं है जिससे वे स्कूल जा सकें। 

 

एक छोटा सा कदम इन बच्चों के जीवन में भारी परिवर्तन ला सकता है। विद्या का अर्थ है शिक्षा और ज्योति का अर्थ है उजाला।  ऑपरेशन ब्लेसिंग इन्डिया उनकी सहायता करने के लिए वचनबद्ध है कि उनके द्वारा लिए गए हर कदम से जो विद्या ज्योति संस्था उठाती है वह बच्चों की शिक्षा द्वारा बच्चों के जीवन में उजाला फैला सके।   

     

क्या आप अनुभव कर सकते हैं कि एक बच्चा जिसे पढ़ने का शौक हो जब उसे किताबें, स्कूल के यूनिफार्म उपहार में दिया जाए और उन्हें स्कूल भेजा जाए, तो वे कैसा अनुभव करेंगे ? हमारे विद्या-ज्योति स्कूल के छात्रों ने इस आनन्द को अनुभव किया था। वे जान गए थे कि अब उन्हें कचरे से सामान उठाने वाले का काम नहीं करना पड़ेगा और व ही यौन व्यापार करना पड़ेगा। 

 

वे निराश और दुखों को अपने पीछे छोड़ चुके हैं। हम यह कहते हुए गर्व का अनुभव करते हैं कि उन बच्चों ने 1.वीं कक्षा पास कर ली है। वे अब अपने लिए सब कुछ अच्छा कर पाते हैं। हमारे लिए ये बच्चे अगुवों से कम नहीं हैं क्योंकि वे केवल अपना भविष्य ही नहीं बदल रहे हैं वरण अपने परिवार का भविषय भी बदल रहे हैं।  

 

क्या आप ऐसे बच्चों की ओर अपनी सहायता का हाथ बढ़ाएँगे ? क्या आप देखना चाहेंगे कि किस प्रकार बच्चे अपने सपनो की उड़ान भरते हैं ? यदि हाँ तो विद्या ज्योति में अपने दान का बीज बोएँ !!! 

       

आप किस प्रकार सहायता कर सकते है ? 

 

आप ओ.बी.आई. के साथ हाथ मिला कर भारत में उनके मानवीय प्रयासों में सहायक हो सकते हैं। इस प्रकार आप यीशु मसीह का प्यार दूसरों तक पहुँचा सकते हैं। इस के लिए आप इ-मेल पर ही अपना दान भेज सकते हैं। आप की सहायता ओ.बी.आई. को अपना समर्थन दे कर उनकी सहायता कर सके है। जिससे वे स्वस्थ्य शिविर, शिक्षा, जल उपलब्द कराने तथा आपत्कालीन समय में भोजन पहुँचाने में उनके कंधे से कंधा मिला कर चल सकते हैं। और ज़रूरतमन्द भाइयों की सहायता कर सकते हैं।   

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आप कैसे सहायता कर सकते हैं?
आप ओ.बी.आई का एक भाग बन सकते हैं। आप मानवीय रूप से प्रयास करके यीशु के प्यार तथा एक आशा
के संदेश के साथ ज़रूरतमन्द लोगों की आज ही ऑनलाइन दान भेज कर सहायता सकते हैं। आपकी सहायता
के साथ ओ.बी.आई. निरन्तर चिकित्सा सहायता, स्वच्छ पानी, शिक्षा तथा आकस्मिक संकट के
समय भाईयों को भोजन तथा अस्थाई घर आदि उपलब्ध करा सकती है।