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एच.आई.वी. / एड्स सुरक्षा और सुझाव के कार्यक्रम
2003 में सूचना मिली है कि भारत में 51 लाख बच्चे और व्यसक एच.आई. वी./एड्स से ग्रसित हैं। (सूचना स्रोत – यू.एन.ए. आई.डी.एस. की 2004 में संसार की एड्स महामारी की रिपोर्ट के अनुसार)
ओ.बी.आई. विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखती है कि स्वास्थ्य शिविरों में झुग्गी झोंपड़ी के इलाकों में एच.आई.वी. की जाँच समय-समय पर की जाए। तब जिन को इस बिमारी से ग्रसित पाया जाता है उन्हें आगे के इलाज के लिए पेशेवर सहायकों के पास भेज दिया जाता है। उन इलाकों में इस रोग के विषय में विशेष जानकारी देने के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जिन में गली में किए छोटे-छोटे नाटक तथा इस रोग से बचने की शिक्षा के विषय में बातचीत की जाती है जिससे लोग इस जानलेवा बीमारी से अपना बचाव कर सकें। इन कार्यक्रमों के द्वारा उन्हें यह भी शिक्षा दी जाती है कि यदि किसी को एच.आई.वी. / एड्स जैसा रोग हो भी गया है तो उसकी देखभाल कैसे की जाती है।
ओ.बी.आई. ने यदागिरीगुट्टा में स्त्रियों के लिए एक पुन: जीवन स्थापना प्रोजैक्ट भी शुरू किया है। जिसके द्वारा वे स्त्रियों और उनके परिवार को यौन व्यापार से दूर रख सकें। यह हैद्राबाद से 70 कि.मी.दूर स्थित है। यहाँ पर स्थानीय पास्टर की सहायता से एक सिलाई स्कूल चलाया जाता है जिससे महिलाएं सिलाई सीख कर पैसा कमा सकें और उन्हें शरीर का व्यापार न करना पड़े। और उस भयानक चंगुल से छुटकारा पा सकें जिस में वे यौन व्यापार के कारण फँसी हुई हैं। अनेक स्त्री व पुरूषों के जीवन जो एच.आई.वी. एड्स के ग्रसित थे उन्हें ओ.बी.आई. के कारण जीने की एक राह मिल चुकी है।
ओ.बी.आई. ने एक मोबाइल जाँच संस्था भी स्थापित की है जो दूर-दूर रहने वाले लोगों को अपने रोग के लिए भी निर्धारित जाँच का सही अवसर देती है।
ओ.बी.आई. निरक्षणा संस्था की सहायतात भी करता है। एक एन.जी.ओ. ने अपना जीवन समर्पित किया है कि वह एच.आई.वी. ग्रसित लोगों को निशुल्क दवाएँ प्रदान करेगा। साथ-साथ उन्हें समय-समय पर सलाह मशवरा भी देगा। इस प्रकार के और भी केन्द्रों की आवश्यक्ता है जो एच.आई.वी. से ग्रसित लोगों की देख भाल करके उन्हें सलाह मशवरा दे सकें।
यदागिरिगुट्टा में 120 यौन व्यापार में फँसे लोगों को सिलाई का प्रशिक्षण दिया गया था। यहाँ पर 28 एच.आई.वी. ग्रसित लोगों को निशुल्क दवाइयों के साथ पौष्टिक आहार देकर रसूलपुरा और अमबेरपेट में मासिक शिविर लगाए जाते हैं। निरक्षणा के द्वारा 450 एच.आई.वी. रोगियों को सलाह के साथ निशुल्क दवाएँ दी जाती हैं।
भीमावरम में 150 एच. आई.वी. रोगियों का प्रति मास इलाज किया जाता है।
एड्स परामर्शहैद्राबाद के एक अनाथालय जहाँ पर एच.आई.वी. ग्रस्त रोगी रहते थे वहाँ से ओ.बी.आई के पास एक फोन गया कि वहाँ के बच्चे आँखों के किसी संक्रमण रोग से पीड़ित हैं...... अपने पति की मृत्यु उसके लिए एक भारी सदमा था। उस पर उसने एक पुत्र को जन्म दिया जिस की उसे काफी समय से प्रतीक्षा थी कि उसका एक बेटा भी... |
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